” आज दिल टूट गया हरीश भाई का वीडियो देखकर। बहुत बुरा लग रहा है। मैं लिटरली इमोशनल हो रहा हूं वो देखने के बाद। हरीश का चेहरा देखकर लग रहा है जैसे वो भी जानता है कि आगे क्या होने जा रहा है। और वो उसके लिए तैयार है। मुझे वो गीत याद आ रहा है अमृत फिल्म का,”दुनिया में कितना गम है। मेरा गम कितना कम है।” खबरों में बताया जा रहा है कि हरीश भाई इस वक्त एम्स में है। और उसका लाइफ़ सपोर्ट सिस्टम हटा दिया गया है।
तेरह साल पहले गाज़ियाबाद के हरीश राणा के साथ एक हादसा हुआ था। वो चौथी मंज़िल से गिर पड़े थे। चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी से हरीश राणा सिविल इंजीनियरिंग कर रहे थे। आखिरी सेमेस्टर में थे। उस हादसे में हरीश राणा के सिर में बहुत गंभीर चोटें आई। हरीश के माता-पिता ने बहुत प्रयास किए उसे ठीक कराने के लिए। जाने कहां-कहां उसका इलाज कराया। मगर हर तरफ से उन्हें निराशा ही मिली। पिछले तेरह साल से हरीश बिस्तर पर पड़ा है। बेचारे माता-पिता। क्या करते? सुप्रीम कोर्ट से बेटे को सम्मानजनक मृत्यु की मांग की, जो उन्हें मिल गई।
हरीश के पिता अशोक राणा ने अपने पुरखों की ज़मीन बेच दी थी उसके इलाज के लिए। उनका तीन मंज़िला मकान भी था, वो भी बेच दिया। क्योंकि हर महीने लगभग सत्तर हज़ार रुपए का खर्च हरीश पर उन्हें करना पड़ता था। हरीश के पिता का कहना है कि अपनी औलाद को पल पल मरते देखना अब उनके बस में नहीं है। वो ही जानते हैं कि उन पर क्या गुज़र रही है। वो ही जानते हैं कि इस वक्त उन्हें कैसा महसूस हो रहा है। अन्य लोग शायद अंदाज़ा भी ना लगा पाएं उनकी पीड़ा का। #HarishRana #harishranacase
