
क्या है जनता की चिंता?
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक तेल बाजार में खलबली मचा दी है। इस संकट के चलते भारत में LPG और कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। सी-वोटर द्वारा किए गए एक वॉर सर्वे के अनुसार, 82% भारतीय मानते हैं कि तेल महंगा होगा जबकि 60% को LPG की कीमतों में वृद्धि का डर सता रहा है। इस सर्वेक्षण से साफ है कि लोगों को युद्ध के प्रभाव और रोजमर्रा की जिंदगी पर इसके असर का डर है।
कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि
कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण एलपीजी और पेट्रोलियम की सप्लाई पर संकट गहरा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह युद्ध तेज होता है तो इसका सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ेगा। सर्वे में पूछे गए प्रश्नों के जरिए लोगों की चिंताओं को समझने की कोशिश की गई है।
क्या आप एलपीजी की कीमतों को लेकर चिंतित हैं?
इस सर्वेक्षण में पूछा गया कि क्या लोगों को रसोई के ईंधन महंगा होने की चिंता है। 26% लोगों ने कहा कि उन्हें कोई चिंता नहीं है, जबकि 28% ने बहुत ज्यादा चिंतित होने की बात कही। यह बताता है कि नागरिकों में चिंता का स्तर बढ़ रहा है।
एलपीजी की कीमतें कितनी बढ़ने की संभावना?
जब लोगों से पूछा गया कि LPG की कीमतें कितनी बढ़ सकती हैं, तो 34% ने 10-20% की वृद्धि की संभावना जताई। 26% लोगों का मानना है कि यह 20-50% बढ़ सकती है। 13% ने कहा कि कीमतें डबल या उससे भी ऊपर जा सकती हैं। इस आंकड़े से साफ है कि जनता को कीमतों में भारी वृद्धि का डर व्याप्त है।
क्या आपके पास वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत है?
इस सर्वे में एक और महत्वपूर्ण सवाल पूछा गया कि क्या लोग एलपीजी के वैकल्पिक स्रोत के बारे में सोच रहे हैं? 36% लोग हां में जवाब देते हैं, जबकि 50% ने नहीं कहा। यह दर्शाता है कि अधिकतर लोगों के पास वैकल्पिक ईंधन की व्यवस्था नहीं है।
क्या आप वैकल्पिक स्रोत खरीदने की योजना बना रहे हैं?
सर्वे में एक अन्य सवाल था कि क्या लोग खाना बनाने के लिए वैकल्पिक स्रोत खरीदने की योजना बना रहे हैं। 35% लोगों ने कहा हां, जबकि 45% ने कहा कि उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। यह बात चिंताजनक है, क्योंकि लोग अभी भी इस संकट का सही समाधान नहीं खोज पा रहे हैं।
महंगाई पर क्या करेंगे?
जब लोगों से पूछा गया कि ईंधन की कमी या कीमतें बढ़ने पर वे सबसे पहले क्या करेंगे, तो 66% ने गोबर या लकड़ी के चूल्हे का इस्तेमाल करने की बात कही। इस प्रतिक्रिया से यह भी साफ होता है कि लोग अपनी जीवनशैली में बदलाव करने को मजबूर हो सकते हैं।
सर्वे के नतीजे
यह सर्वे C-Voter द्वारा मार्च में किया गया है, जिसमें भारत के विभिन्न राज्यों और जिलों से लोगों की राय ली गई थी। सर्वे का मार्जिन ऑफ एरर +/ – 5% है, जिससे यह साफ होता है कि लोगों की चिंता और कीमतों की संभावना को ध्यान में रखना जरूरी है। यह सर्वेक्षण यह दर्शाता है कि वैश्विक संघर्ष का स्थानीय स्तर पर भी व्यापक असर है
