बिजनौर में गैर जनपद से आने जाने वाले वाहनों से यातायात पुलिस कर रही खेल..!

भारी जुर्माने का हवाला देकर वाहन चालकों का उत्पीड़न..!

गैर जनपद के आने जाने वाले वाहन स्वामी कहि शिकायत तक नही कर सकते,इसी का फायदा उठाकर खेल..!

डीजीपी के आदेश का हो रखा खुला उलंधन..!

बिजनौर।एक तरफ जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भ्रष्टाचार करने वालों पर प्रहार कर रहे हैं तो वही बिजनौर में यातायात पुलिस वाहन चेकिंग के नाम पर लोगों को रोककर उनका उत्पीड़न कर रही है! गैर जनपद के वाहनों का नंबर देखकर उन्हें रोककर परेशान तो कर ही रही है साथी अवैध वसूली का भी खेल बना रखा है!जबकि डीजीपी का साफ आदेश हैं कि गैर जनपद के आने जाने वाले वाहनों को परेसान ना किया जाये लेकिन उसके बावजूद भी बिजनौर यातायात पुलिस बिजनौर नजीबाबाद बाईपास हो या हल्दौर धामपुर बाईपास चांदपुर बाईपास पर खड़े होकर चेकिंग के नाम पर वाहन स्वामियों को परेशान कर उन्हें वाहन चेकिंग के दौरान प्रदूषण, आरसी (पंजीकरण प्रमाणपत्र) व बीमा जैसे कागज चेक करने के नाम पर यातायात पुलिस द्वारा एमवी (मोटर व्हेकिल) एक्ट में जुर्माने की राशि बढ़ाए जाने के बाद पुलिसकर्मियों के भारी जुर्माने का हवाला देकर वाहन चालकों का उत्पीड़न कर करने रही है,यातायात पुलिस को मालूम हैं कि गैर जनपद के आने जाने वाले वाहन स्वामी कहि शिकायत तक नही कर सकते इसी का फायदा उठाकर खेल खेला जा रहा है!यातायात विभाग द्वारा शुरू किया गया वाहन चेकिंग अभियान ट्रैफिक पुलिस के लिए कमाई का जरिया बन चुका है! वाहन के कागजात और लाइसेंस नहीं होने पर ट्रैफिक पुलिस वाहन चालकों से अवैध वसूली का कोई मौका नहीं छोड़ती।वाहनों की जांच के नाम पर सड़क पर कहीं भी ओर कभी भी वसूली अभियान शुरू हो जाता है!शहर से बाहर जाने वाली सड़कों पर हालत और भी खराब है।बोलचाल की भाषा में वसूली कहलाने वाली यह प्रथा यहां रोजाना चलती है। वाहन चालकों की मजबूरी है कि वे चाहकर भी नहीं नहीं कह सकते। प्रदेश के डीजीपी भी पुलिस की इस वसूली पर चिंता जाहिर कर चुके हैं! ट्रैफिक पुलिस चालान के दौरान यह बताना जरूरी नहीं समझते कि चालान किस लिए किया जा रहा है। यह प्रयास भी नहीं किया जाता कि चालान करने के बाद वाहन चालक अपनी गलती सुधार रहा है या नहीं। यदि गलती नहीं सुधरती तो चालक को क्या सजा मिलती है।बस चेकिंग के नाम पर वाहन स्वामियों का उत्पीड़न ही हो रहा है वरिष्ठ अधिकारियों को चाहिए कि एक गुप्त टीम बनाकर ऐसे ट्रैफिक पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करें और दूध का दूध और पानी का पानी करके रखें।

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