
सी-वोटर के ‘वॉर सर्वे’ में भारत की जनता ने कई अहम सवालों का जवाब दिया है। इस सर्वे में ये जानने की कोशिश की गई कि क्या रूस अमेरिका से ज्यादा भरोसेमंद है। लोगों ने चीन को पाकिस्तान से बड़ा खतरा बताया है। साथ ही, भारत की विदेश नीति पर लोगों की राय भी मिली है। क्या इसके पीछे देश की अर्थव्यवस्था का दबाव है? सर्वे में शामिल लोगों की राय अहम है।
चीन या पाकिस्तान: भारत के लिए बड़ा खतरा कौन?
सर्वे के दौरान एक महत्वपूर्ण सवाल पूछा गया कि भारत के लिए बड़ा खतरा कौन सा देश है। चीन को अधिकतर लोगों ने भारत के लिए बड़ा संकट माना। सर्वे में दूसरे हफ्ते में 41 फीसदी, तीसरे हफ्ते में 44 फीसदी और चौथे हफ्ते में भी 44 फीसदी लोगों ने चीन को खतरा बताया। वहीं पाकिस्तान का नाम लेने वालों की संख्या थोड़ी कम रही, जहां दूसरे हफ्ते में 30 फीसदी, तीसरे हफ्ते में 31 फीसदी और चौथे हफ्ते में 34 फीसदी लोग पाकिस्तान को खतरा समझते हैं।
भारत को किस पर अधिक भरोसा करना चाहिए?
सर्वे में सबसे दिलचस्प सवाल यह था कि भारत को किस देश पर अधिक भरोसा करना चाहिए। लोगों ने अमेरिका की तुलना में रूस पर अधिक भरोसा जताया। दूसरे हफ्ते में 67 फीसदी, तीसरे में 73 फीसदी और चौथे में 70 फीसदी लोगों ने रूस को दुनिया में विश्वसनीय समझा। अमेरिका के लिए, लोगों का भरोसा क्रमशः 10, 11 और 14 फीसदी रहा।
क्या विदेश नीति से जनता संतुष्ट है?
जब विषय विदेश नीति की संतोषजनकता का आया, तो ज़्यादातर लोगों ने कहा कि वे इससे संतुष्ट हैं। सर्वे के दूसरे, तीसरे और चौथे हफ्ते में क्रमशः 32 फीसदी, 33 फीसदी और 27 फीसदी लोगों ने विदेश नीति को काफी अच्छा बताया। हालांकि, कुछ लोगों ने संतुष्टि की कमी का भी इज़हार किया।
इस युद्ध का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर
सर्वे में एक और महत्वपूर्ण सवाल था कि इस युद्ध का भारत में सबसे अधिक असर किस पर पड़ेगा। लोगों ने बताया कि अर्थव्यवस्था पर सबसे ज्यादा असर होगा। दूसरे हफ्ते में 45 फीसदी, तीसरे में 50 फीसदी और चौथे में 47 फीसदी लोगों ने इसका उल्लेख किया। विदेश नीति और राजनीति पर इसका असर बहुत कम बताया गया।
C-Voter सर्वे की प्रक्रिया
यह सर्वे C-Voter ने मार्च महीने में तीन हफ्तों में किया। इसके तहत सभी राज्यों और जिलों से लोगों के फोन पर बातचीत की गई ताकि उनकी राय जुटाई जा सके। परिणामों को +/- 5% के मार्जिन ऑफ एरर के साथ देखा जा सकता है। इस तरह के सर्वेक्षण लोगों की सोच और प्रतिक्रिया का एक दर्पण पेश करते हैं, जो देश की सुरक्षा और विदेशी नीतियों पर महत्वपूर्ण दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हैं।
