
असम विधानसभा चुनाव से पहले ‘बीफ विवाद’ ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने एजेपी उम्मीदवार कुंकी चौधरी पर बीफ खाने के आरोप लगाए और पशु संरक्षण कानून के उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी। इस विवाद के चलते असम में सभी राजनीतिक दल तेजी से रैलियां कर रहे हैं। आरोप-प्रत्यारोप का यह दौर असम की राजनीति में एक नया मोड़ ला रहा है।
कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा है कि असम में बीफ खाने की संस्कृति को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता। उन्होंने दावा किया कि उनके आग्रह पर कई मुस्लिम समुदाय के लोग अब भैंस का मांस खा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी कि जो भी गाय का मांस खाएगा, उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी। यह बयान राजनीतिक माहौल को और भी गरमा रहा है।
AJP की प्रतिक्रिया
AJP ने इसे बीजेपी की एक राजनीतिक साजिश बताया है। बीफ विवाद के बीच कुंकी चौधरी को गुवाहाटी में एक रैली के दौरान विरोध का सामना करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने ‘AJP गो बैक’ के नारे लगाए। चौधरी ने आरोप लगाया कि बीजेपी के आईटी सेल ने उनका एक एआई-जनित वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर फैलाया है।
चौधरी का सवाल
कुंकी चौधरी ने सवाल उठाते हुए कहा, ‘इतनी बेताबी क्यों? बीजेपी का आईटी सेल ऐसे वीडियो बनाने में इतना पैसा और मेहनत क्यों खर्च कर रहा है؟ अगर उन्हें वीडियो बनाना ही है, तो वे मेरे घर आ सकते हैं और मैं बयान दूंगी’। इस तरह की बातें और भी दिलचस्प हो जाती हैं जब राजनीतिक माहौल इतना टकराव भरा हो।
सरमा का शक्ति प्रदर्शन
इसी बीच, सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने जोरहाट में एक बड़ा रोड शो किया। गौरव गोगोई का गढ़ माना जाने वाला यह क्षेत्र बीजेपी के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। रोड शो के दौरान सरमा ने दावा किया कि जोरहाट में लोगों का भारी समर्थन गोस्वामी के साथ है। उन्होंने कहा कि लोग विकास के लिए वोट देंगे और बीजेपी सभी सीटों पर जीत दर्ज करेगी।
आगामी चुनावों का असर
जोरहाट में गोस्वामी की लोकप्रियता और निर्वाचन क्षेत्र के लोगों के साथ उनके लंबे संबंधों को देखते हुए, यह देखना दिलचस्प होगा कि वे अपने पक्ष में वोटों को कैसे एकजुट करते हैं। 9 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले राज्य में राजनीतिक बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। यह स्पष्ट है कि असम की राजनीति में बीफ विवाद ने एक नई गरमी बढ़ा दी है।
