
छत्तीसगढ़ का सुकमा जिला नक्सलवाद से मुक्त घोषित
छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त घोषित कर दिया गया है। यह महत्वपूर्ण घोषणा सुकमा के पुलिस अधीक्षक (SP) किरण जी चव्हाण ने मंगलवार को की। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि हाल ही में दो महिलाओं ने नक्सलियों के साथ अपना नाता तोड़ते हुए आत्मसमर्पण किया है। उनके पास से AK-47 और अन्य घातक हथियार भी बरामद किए गए हैं, जो इस सफल ऑपरेशन की पुष्टि करते हैं।
महिला नक्सलियों का इतिहास
दोनों महिला नक्सलियों का नाम सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। आत्मसमर्पण करने वाली महिलाओं में एक ने कहा कि नक्सल जीवन बहुत मुश्किल है और अब वह एक नया जीवन शुरू करना चाहती है। इस कदम से न केवल इन महिलाओं का जीवन बदलेगा, बल्कि यह अन्य नक्सलियों को भी मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित कर सकता है।
नक्सलवादी आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025
छत्तीसगढ़ सरकार ने नक्सलियों को मुख्यधारा में वापस लाने के लिए ‘नक्सलवादी आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025’ लागू की है। इस नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले व्यक्तियों को आर्थिक सहायता से लेकर रोजगार और आवास तक की व्यापक सुविधाएँ दी जा रही हैं। इस नई नीति के प्रमुख प्रावधान निम्नलिखित हैं-
- तत्काल और वित्तीय सहायता
नकद सहायता: आत्मसमर्पण करने वाले प्रत्येक नक्सली को ₹50,000 की तत्काल अनुग्रह राशि दी जाती है।
हथियार सरेंडर बोनस: हथियारों के साथ आत्मसमर्पण करने पर अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि का प्रावधान है:
LMG (लाइट मशीन गन): ₹5 लाख
AK-47 राइफल: ₹4 लाख
INSAS या SLR राइफल: ₹2 लाख
विवाह अनुदान: अविवाहित या विधवा/विधुर आत्मसमर्पित नक्सलियों को शादी के लिए ₹1 लाख की सहायता दी जाती है। - आवास और सामाजिक सुरक्षा
आवास सहायता: आत्मसमर्पण करने वाले व्यक्तियों को प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत प्राथमिकता दी जाती है। पात्र व्यक्तियों को आवासीय भूमि या घर निर्माण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने के भी प्रावधान हैं।
कृषि भूमि: पुनर्वास नीति के मानदंडों के अनुसार, खेती के माध्यम से आजीविका चलाने के इच्छुक व्यक्तियों को कृषि भूमि आवंटित करने की सुविधा भी दी जाती है। - शिक्षा और कौशल विकास
व्यावसायिक प्रशिक्षण: पूर्व नक्सलियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न ट्रेडों में कौशल विकास और व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण अवधि के दौरान मासिक वजीफा देने का भी प्रावधान है ताकि वे अपना खर्च चला सकें।
बच्चों का भविष्य: उनके बच्चों की शिक्षा के लिए विशेष व्यवस्था की गई है, जिसमें स्कूल स्तर पर निःशुल्क शिक्षा और उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति शामिल है। - रोजगार के अवसर
सरकारी सेवा: पात्रता और समर्पण के बाद के आचरण के आधार पर, कुछ व्यक्तियों को पुलिस विभाग या अन्य सरकारी सेवाओं में नियोजित करने पर विचार किया जाता है।
स्वरोजगार: अपना छोटा व्यवसाय या कुटीर उद्योग शुरू करने के इच्छुक लोगों को कम ब्याज पर ऋण और सब्सिडी प्रदान की जाती है। - कानूनी प्रक्रिया और सुरक्षा
मामलों की समीक्षा: आत्मसमर्पण करने वालों के विरुद्ध लंबित कानूनी मामलों की समीक्षा की जाती है और नीति के अनुसार सामान्य प्रकृति के मामलों में राहत देने का प्रयास किया जाता है।
सुरक्षा: मुख्यधारा में लौटने वाले व्यक्तियों और उनके परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना इस नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके अतिरिक्त, सामुदायिक स्तर पर विकास को बढ़ावा देने के लिए उन क्षेत्रों को विशेष अनुदान दिया जाता है जो नक्सलवाद से मुक्त होकर शांति की राह पर आगे बढ़ते हैं। इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य हिंसा का मार्ग छोड़कर आने वाले व्यक्तियों को समाज की मुख्यधारा में सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर प्रदान करना है।
सुरक्षा बलों की मेहनत रंग लाई
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि यह सफलता सुरक्षा बलों के लगातार प्रयासों का नतीजा है। पिछले कुछ महीनों में, सुरक्षा बलों ने कई सफल ऑपरेशन किए हैं, जिससे नक्सलियों के खिलाफ दबाव बढ़ा है। सुकमा जिले में सुरक्षा स्थिति में सुधार हुआ है और अब इलाके को ‘नक्सल फ्री’ घोषित किया गया है।
इलाके में सामान्य जीवन की वापसी
नक्सलवाद के प्रभावी नियंत्रण ने स्थानीय लोगों को राहत दी है। अब लोग रोजमर्रा की जिंदगी में सामान्य तरीके से जीने लगे हैं। स्कूल, व्यवसाय और स्वास्थ्य सेवाएं अब बिना डर के संचालित हो रही हैं। यह विकास इलाके के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
स्थानीय प्रशासन की भूमिका
स्थानीय प्रशासन ने इस सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रशासन ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों को बढ़ावा दिया है। स्कूलों और स्वास्थ्य केंद्रों के लिए नए प्रोजेक्ट्स शुरू करने के साथ-साथ, पुलिस और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय से स्थिति बदली है।
आगे की योजना: नक्सलवाद के खिलाफ जागरूकता
जिले के विकास के लिए आगे की योजना में नक्सलवाद के खिलाफ जागरूकता फैलाने पर जोर दिया जाएगा। अब प्रशासन स्थानीय लोगों के साथ मिलकर कार्यक्रम आयोजित करेगा, ताकि युवा नक्सलवाद के झांसे में न आएं। यह सुनिश्चित करने के लिए कि लोग सही रास्ते पर चलें, सभी प्रयास किए जाएंगे।
सुकमा का भविष्य: आशा की किरण
सुकमा का भविष्य अब सुरक्षित नजर आ रहा है। नक्सलवाद से मुक्ति के इस ऐतिहासिक क्षण का जश्न मनाने के साथ-साथ, सुरक्षा बलों और स्थानीय लोगों की मेहनत का फल अब देखने को मिल रहा है। यदि इस प्रकार के प्रयास जारी रहे, तो सुकमा जल्द ही आदर्श क्षेत्र बन सकता है।
