
स्वच्छ भारत और स्वच्छ विद्यालय अभियान,जिम्मेदार..?
स्कूल या विद्यालय में बुनियादी ढांचे को लेकर पहले भी तमाम प्रश्न उठते रहे हैं और अक्सर सरकार इस समस्या को दूर करने का आश्वासन देती रही है। लेकिन आज भी हालत किसी से छिपे नही है! देश में विकास की चमकती तस्वीर के बरक्स शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में बच्चियों की पढ़ाई छूट जाना चिंता का विषय है! यह स्वच्छ भारत और स्वच्छ विद्यालय अभियान के लक्ष्य पर भी सवालिया निशान है!हर वर्ष के मुकाबले हर दूसरे वर्ष में बच्चियों के लिए अलग से शौचालय की सुविधा में गिरावट दर्ज देखी जाती है!सोचनीय यह है कि क्या विद्यालयों में लैंगिक समानता बनाए रखने और बच्चियों के लिए अलग से शौचालय की सुविधा देने का प्रयास किया जा रहा है!मगर जमीनी सच्चाई यही है कि कई सरकारी विद्यालयों में शौचालय बदतर स्थिति में हैं न तो उनकी सफाई होती है और न ही वहां पानी की व्यवस्था होती है!जबकि स्कूलों विद्यालयों में लड़के-लड़कियों के लिए अलग-अलग शौचालय की व्यवस्था और उनमें पानी और साबुन की व्यवस्था करने की भी कई बार सरकार ने हिदायत दी हुई है!बल्कि इन स्कूलों व विद्यालयों में शौचालय की खराब हालत के लिए शिक्षा विभाग व प्रशासन की सुस्ती कम जिम्मेदार नहीं है! अगर शौचालयों की कमी के कारण लड़कियों की पढ़ाई छूट रही है, तो समूचे शिक्षा के परिदृश्य में इससे अफसोसनाक स्थिति और क्या होगी? इसके लिए स्कूलों की देखरेख से संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए!इसमें दोराय नहीं कि गंदा शौचालय और वहां पानी का अभाव लड़कियों के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है!सवाल है कि स्वच्छ शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव की समस्या की हकीकत के समांतर स्वच्छ विद्यालय अभियान के लक्ष्य को कितना सार्थक कहा जा सकता है!
