
भगवंत मान सरकार के “युद्ध नशेयां विरुद्ध” अभियान ने पंजाब के फरीदकोट को नशा विरोधी मिशन में एक आदर्श जिला बना दिया है। सख्त पुलिसिंग, तकनीक का उपयोग और जनभागीदारी के साथ यह जिला नशा तस्करों के खिलाफ मजबूती से खड़ा हुआ है, जिससे कानून-व्यवस्था में सुधार हुआ है। इस अभियान के तहत जिले में कुल अपराध में 37% की कमी आई है। इसके अलावा, लूटपाट के मामलों में भी 97% रिकवरी दर हासिल की गई है।
पुलिस की रणनीतियों का असर
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ग्राम रक्षा समितियों (VDC), गैर-सरकारी संगठनों (NGO) और स्थानीय सामाजिक संस्थाओं के साथ नियमित बैठकों से जमीनी स्तर पर खुफिया जानकारी बढ़ी है। इससे लोगों में नशा तस्करों के खिलाफ जानकारी साझा करने का हौसला बढ़ा है। यह सक्रिय सहयोग पुलिस को त्वरित और सटीक कार्रवाई में मदद कर रहा है।
विश्वास बढ़ाने वाले कदम
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) प्रज्ञा जैन ने कहा कि इस अभियान के चलते लोगों का पुलिस पर भरोसा बढ़ा है। सूचनादाताओं की पहचान गोपनीय रखी जाती है, जिससे लोग खुलकर जानकारी दे सकते हैं। हर आयु वर्ग के लोग इस अभियान में सक्रिय हैं, जो नशे और अपराध के खिलाफ एक महत्वपूर्ण ताकत बनकर उभरा है।
तकनीक की भूमिका
फरीदकोट में तकनीक का माहौल भी भव्य रहा है। CCTV कैमरों का नेटवर्क प्रमुख स्थानों पर स्थापित किया गया है, जिससे पुलिस की निगरानी और प्रतिक्रिया क्षमता बेहतर हुई है। ढिलवां कलां गांव में एक विस्तृत सीसीटीवी सिस्टम लगाया गया है, जो लिंक सड़कों और आसपास के राजमार्गों को कवर करता है। इस प्रणाली की रियल-टाइम निगरानी स्थानीय प्रशासन और पुलिस दोनों के पास उपलब्ध है।
सिविल सोसायटी की सराहना
सिविल सोसायटी के प्रतिनिधियों ने भी इन प्रयासों की सराहना की है। सहारा सेवा सोसाइटी के चेयरमैन प्रवीण काला ने बताया कि पुलिस की सख्त कार्रवाई ने नशा तस्करी के नेटवर्क को बड़ा झटका दिया है। इसका नतीजा यह है कि लोगों का पुलिस के साथ सहयोग लगातार बढ़ता जा रहा है।
समुदाय की भागीदारी
अधिकारियों ने बताया कि सख्त कार्रवाई के साथ-साथ जागरूकता अभियान और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय भी चलाए जा रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण और पौधारोपण जैसे सामुदायिक पहल भी इस अभियान का हिस्सा हैं, जिससे नशा विरोधी जागरूकता को दीर्घकालिक बनाए रखा जा सके।
